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नूंह , 08 जून: उपायुक्त मनीराम शर्मा की अध्यक्षता में जिले के सभी विभागों के अधिकारियों व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मलेरिया जैसे खतरनाक बिमारी को जड़ से खत्म करने के लिए एक बैठक आयोजित की गई।

नूंह , 08 जून: उपायुक्त मनीराम शर्मा की अध्यक्षता में आज वीरवार को उनके कार्यालय में जिले के सभी विभागों के अधिकारियों व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मलेरिया जैसे खतरनाक बिमारी को जड़ से खत्म करने के लिए एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित सभी जिले के अधिकारियों को उनके विभाग से संबंधित दिशा-निर्देश दिए गए और कहा कि वे भी इस काम में अपना पूर्ण सहयोग दे। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव में जाकर लोगों को मलेरिया के प्रति जागरुक करें तथा कहा कि वे गांव में जाकर मलेरिया जैसी बीमरी को रोकने के लिए मलेरिया के मच्छरों को मराने व उन्हें रोकने के लिए घर-घर जाकर दवाई का छिडकाव करें।

इस कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी डा. राजीव व उसकी टीम के सदस्यों ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को बुखार होने की स्थिति में खून की जांच अवश्य करवाई जाए। मलेरिया की पुष्टि होने पर 14 दिन के लिए नियमित पूर्ण उपचार करवाएं। इस मौसम में खुले में न सोएं तथा सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें। मलेरिया की दवाई का छिडक़ाव अवश्य करवाएं तथा छिडक़ाव के लिए आने वाले कर्मचारियों को दवा के छिडक़ाव से मना न करें। आसपास के तालाबों मेंं लारवाभक्षी गंबूजिया और गप्पी मछलियां का बीज डालें। डेंगू का मच्छर दिन के समय काटता है तथा सिर्फ 400 मीटर तक उड़ सकता है, इसलिए सप्ताह में एक बार कुलर, फूलदान, पक्षियों के पीने का पानी के बर्तनों को रगडक़र साफ करें तथा घर के आसपास कपों व गिलासों में पानी न भरने दें। पानी की टंकी खुली न छोड़ें तथा इसे समय-समय पर साफ करते रहें। घर के ऊपर मटका, बर्तन उल्टे रखें तथा छत पर टायर न रखें। बुखार होने पर डाक्टर की सलाह लें तथा बुखार होने पर पैरासिटामोल ले सकते हैं, लेकिन डिस्परिन न लें। मलेरिया के परजीवी का वाहक मादा एनोफिलेज मच्छर है। इसके काटने पर मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवेश कर के बहुगुणित होते हैं जिससे रक्तहीनता के लक्षण उभरते हैं जैसे कि चक्कर आना, सांस फूलना, द्रुतनाड़ी इत्यादि। इसके अलावा अविशिष्ट लक्षण जैसे कि बुखार, सर्दी, उबकाई और जुखाम जैसी अनुभूति भी देखे जाते हैं। गंभीर मामलों में मरीज मूच्र्छा में जा सकता है और मृत्यु भी हो सकती है।

डा. विमलेश तिवारी ने बताया कि मलेरिया के फैलाव को रोकने के लिए कई उपाय किये जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मलेरिया की रोकथाम के लिये यद्यपि टीके, वैक्सीन पर शोध जारी है। इनमें से ज्यादातर पाँच वर्ष से कम आयु वाले बच्चें होते हैं, वहीं गर्भवती महिलाएं भी इस रोग के प्रति संवेदनशील होती हैं। उन्होंने कहा कि मलेरिया एक ऐसी बीमारी है, जो परजीवी रोगाणु की वजह से होती है। ये रोगाणु इतने छोटे होते हैं कि हम इन्हें देख नहीं सकते। मलेरिया के लक्षण हैं बुखार, कँपकँपी, पसीना आना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जी मचलना और उल्टी होना। कभी-कभी इसके लक्षण हर 48 से 72 घंटे में दोबारा दिखायी देते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि एक व्यक्ति को कौन-से परजीवी की वजह से मलेरिया हुआ है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सुशासन सहयोगी मोहित सोनी, एसडीएम नूंह डा. मनोज कुमार, सिविल सर्जन डा. श्रीराम सिवाच, डा. कमल मेहरा, नायब तहसीलदार नूंह शेरसिंह,सहित अन्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।